Thursday, 15 March 2012

एक बिंदु नो

भले छे धरती ने सागर पण वरसाद एने जोशे एक बिंदु नो!
छे आकाश मोकालू पण पण रंग जोशे रंगवा एक बिन्दुनो!
नदी छे छालोछल पण एने प्रवाह जोशे एक बिंदु नो !
शब्दों छे हजारो ने भाषा घनी, व्यक्त करावा जोशे भाव एक बिंदु नो !
समाप्ति ना पूर्ण विरामने आशय जोशे एक बिन्दुनो !


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